जे एन यू में छात्र राजनीति

जे एन यू अपने बेहतरीन शैक्षिक माहौल के अलावा कुछ अन्य चीज़ों के लिए भी जाना जाता है जो इसे अन्य शैक्षिक संस्थानों से अलग करता है। यहां की छात्र राजनीति भी उनमें से नेक है। आज जहां देश के अन्य विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति हिंसा, बाहुबल, धनबल और भ्रष्टाचार जैसी बुराईयों से ग्रस्त है वहीं जे एन यू की छात्र राजनीति आज भी लोकतंत्र के उच्चतम मानदन्डों को न सिर्फ़ सहेजे हुए है बल्कि दिनोंदिन उन्हें नई उंचाईयों की ओर ले जाने के लिए प्रयत्न्शील है। यहां चुनावी मुद्दों में छात्र हितों की बात तो होती ही है पर यह जानकर शायद आपको आश्चर्य हो कि यहां सिंगुर, नंदीग्राम, गोधरा और आतंकवाद के साथ-साथ इजराइल-फ़िलीस्तीन और न्यूक्लियर डील जैसे मुद्दे भी चुनावों में अहम भुमिका निभाते हैं। इन मुद्दों पर छात्र संगठनों के बीच न सिर्फ़ स्वस्थ और सार्थक बहस होती है बल्कि छात्रों की बौद्धिक सोच को समाज तक पहुंचाकर जागरुकता फ़ैलाने और एक जन-आंदोलन की शुरुआत करने की कोशिश भी की जाती है। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस प्रकार की गंभीर और मुद्दों और मूल्यों से जुड़ी राजनीति छात्रों को न सिर्फ़ एक वैचारिक धरातल प्रदान करती है बल्कि विभिन्न सामाजिक, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विषयों पर उनके विचारों को एक नई परिपक्वता देती है। ये छात्र जब अपनी शिक्षा पूरी करके नौकरशाही, व्यवसाय, राजनीति या समाज के अन्य किसी क्षेत्र का हिस्सा बनते हैं तो निश्चित रूप से उस क्षेत्र को एक कुशल और प्रखर नेतृत्व प्रदान करते हैं। प्रकाश करात और सीताराम येचुरी जैसे नेता जे एन यू छात्र राजनीति की ही देन हैं।

जे एन यू छात्र राजनीति की एक विशेषता यह भी है कि यहां पूरी चुनाव प्रक्रिया का संचालन खुद छात्रों द्वारा किया जाता है तथा जे एन यू प्रशासन की इसमें कोई भुमिका नहीं होती। काबिले-तरीफ़ बात यह है कि यह काम इतने कुशल, निष्पक्ष और अनुशासित तरीके से संपादित किया जाता है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के बड़े पदाधिकारी भी इसके उदाहरण देते हैं। हाल ही में लिंग्दोह कमिटी ने अपनी रिपोर्ट मे जे एन यू की चुनाव प्रक्रिया को एक आदर्श के रूप में स्वीकार किया है। यहां सभी छात्र नेता सिर्फ़ हाथ से लिखे पोस्टर्स, ए-४ साइज़ पर्चों और व्यक्तिगत सम्पर्क के माध्यम से प्रचार करते हैं । चुनाव के संचालन के लिए छात्रों द्वारा एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव समिति का गठन किया जाता है। स्कूल स्तर पर काउंसिलर्स तथा केन्द्रीय पैनल के लिये अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए चुनाव किया होता है। चुनाव से ठीक पहले जीबीएम (आम छात्र सभा) बुलाई जाती है जिसमें सभी उम्मीदवार छात्रों के समक्ष अपने विचार और योजनाओं को रखते हैं और उनपर उठाए गए सवालों के जवाब देते हैं।

चुनावों के लिए नामांकन के बाद से कैंपस में राजनीतिक माहौल गरमा जाता है और ढाबों पर चाय के साथ गरमागरम बहसों का दौर शुरू हो जाता है। रात को डिनर के बाद रोज किसी न किसी हॉस्टल मेस मे पॉलिटिकल मीटिंग होती ही है। कुल मिलाकर १०-१५ दिनों तक उत्सव का सा माहौल रह्ता है। छात्रों के उत्साह और राजनीतिक जागरुकता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जे एन यू मे मतदान का प्रतिशत ६०% से भी ज्यादा होता है।

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